Tuesday, 16 January 2024

झुंजार दौलत सिंह जी जोधा ठिकाना झाक

 झुंजार श्री दौलत सिंह जी विक्रमादेवोत्त जोधा व श्री सती माताजी फुल कुंवर जी देवड़ा जी का सम्पूर्ण इतिहास ठिकाना झाक




दौलत सिंह जी विक्रमादेवोत जोधा ठीकाना रामसीन से अपने ठिकाने झाक पधार रहे थे तब झाक और रतपुरा के बीच नदी के किनारे मीणा जात के डाकू घाव लगाकर बैठे थे और जब दौलत सिंह जी अपनी घोड़ी के साथ वहा से गुजरे तब उन्हें भालो से गुज दिया फिर भी दौलत सिंह जी ने डाकुओं का सामना किया और 2 डाकू को मार गिराया उसके बाद खून से सनी नंगी तलवार और छाती में भाला लगा हुआ घोड़ी रावले लेकर आई वहा सभी सरदार रावली पोल में विराजे हुए थे और दौलत सिंह जी ने कहा आपना राम राम सा और भाला शरीर से निकालते ही स्वर्ग सिधार गए और फिर ठाकुर साहब[ हिंदूसिंह जी ] ने पन्नाजी राइका को फूलकंवर देवड़ी सा को बुलाने मंडोली भेजा और पन्ना जी राइका ने दौलतसिंह जी दाता का साफा देवड़ी सा के आगे रख दिया और फूलकंवर जी समझ गए कि हुकुम में घात हो गयी है और फूलकंवर जी ने पन्ना जी से कहा कि मेरे धर्म भाई गाडलिया लौहार सांवला जी को बुलाइये और सांवला जी आये तो बोले बाईसा हुक्म फ़रमावो और फूलकंवर जी ने कहा कि वीरा थारे बहनोईसा में पापी घात करदी है म्हाने सती होणो है थू म्हाने म्हारे हुक्म रे जलमभोम झाक रावला में पुगाई दे थाने विनती करूंपछे सांवला जी आपरे बैल गाडी में फूलकंवर जी ने लेय झाक रावला में आया और फूलकंवर देवडीजी ने अपने धर्म भाई को हाथ सु सोना री अंगूठी दी तब सभी सरदारों ने सावला जी से कहा कि आप रुक जाओ पर सांवला जी ने इंकार करदिया और कहा की में अपनी बहन को सती होते हुए नही देख पाऊंगा तो वो मांडोली के लिए रवाना होग्ये और फुल कुंवर जी को पर्दा लगाकर रावले में लाया गया और फुल कुंवर जी ने कहा कि में सती हो जाऊंगी फिर उनके कहने के 6 माह के बाद वे सती होगये!!

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झुंजार दौलत सिंह जी जोधा ठिकाना झाक

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